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कबाड़ से कमाई तक–डूडा की ‘पिंक बस’ बनी महिला आत्मनिर्भरता की नई पहचान

महिला सशक्तिकरण का अनोखा मॉडल—कबाड़ बसों में पिंक टॉयलेट और कैफेटेरिया, रोज़गार से जुड़ीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं

स्वयं शाही
स्वतंत्र पत्रकार विज़न

जनपद गोरखपुर जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) गोरखपुर ने कबाड़ घोषित बसों को उपयोगी संसाधन में बदलकर महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश की है। डूडा के अभिनव प्रयोग के तहत दो कबाड़ बसों को आधुनिक पिंक टॉयलेट और कैफेटेरिया में तब्दील किया गया है, जिनका संचालन स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कर रही हैं। इस पहल से न सिर्फ महिलाओं को सुरक्षित सुविधाएं मिली हैं, बल्कि उन्हें स्थायी रोज़गार का अवसर भी प्राप्त हुआ है।इनमें से एक पिंक टॉयलेट बस एवं कैफेटेरिया का सफल संचालन कर रही कृपा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रानी देवी आज आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन चुकी हैं। नौका विहार गेट के पास संचालित इस पिंक बस से रानी देवी अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनके पति के अस्वस्थ होने के कारण परिवार का संपूर्ण दायित्व उन्हीं पर है, जिसे यह पहल मजबूती दे रही है।डूडा द्वारा यूपी रोडवेज से कबाड़ घोषित बस प्राप्त कर उसका पुनरुद्धार किया गया। पिंक टॉयलेट बस में महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फीडिंग एरिया, तीन सामान्य शौचालय, एक वेस्टर्न सीट शौचालय, पीछे हाथ धोने की सुविधा, तथा अंत में छोटा कैफेटेरिया विकसित किया गया है। बस में सोलर सिस्टम से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था है और पानी के लिए 500-500 लीटर की दो टंकियां स्थापित की गई हैं।डूडा के परियोजना अधिकारी राजू कुमार के अनुसार यह नवाचार राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में शहर में ऐसी दो बसें चल रही हैं। रानी देवी बताती हैं कि डूडा की सहायता से उन्हें औसतन 18 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है। भविष्य में वे कैफेटेरिया में स्थानीय प्रचलित व्यंजन भी उपलब्ध कराने की योजना बना रही हैं।डूडा की यह पहल कबाड़ से कमाई और सुविधा से सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है, जो शहरी आजीविका और महिला स्वावलंबन—दोनों को एक साथ मजबूती दे रही है।

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